Saturday , April 20 2019
Loading...
Breaking News

ऑस्ट्रेलियाई शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले दक्षिण एशियाई छात्र हो रहें यौनशोषण का शिकार

ऑस्ट्रेलियाई शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले दक्षिण एशियाई छात्र अक्सर यौनशोषण का शिकार होते हैं और आरेपितों के खिलाफ कार्रवाई भी नहीं होती है. हालांकि इस तरह के अधिकांश मामलों की शिकायत भी नहीं की जाती है. यह जानकारी सोमवार को मीडिया रिपोर्ट से मिली. विदित हाे कि साल 2017 में ऑस्ट्रेलियन यूनिवर्सिटी में यौन हमलों और यौन उत्पीड़न पर ऑस्ट्रेलियाई मानवाधिकार आयोग ने भी अपनी रिपोर्ट में इस तरह की घटनाओं की पुष्टि की थी.

एएचआरसी ने अपनी रिपोर्ट में पाया था कि 2015 और 2016 में यौन उत्पीड़न का शिकार अधिकतर छात्राओं के साथ सार्वजनिक यातायात सेवाओं में छेड़छाड़ की गई. यूनिवर्सिटी में यौन हमले का सामना करने वाली 51 प्रतिशत छात्राओं का कहना था कि वह हमलावर को जानती हैं.दरअसल इस तरह की घटनाएं दोस्ताना दबाव में भी होती है और पीड़िता मुंह तक नहीं खोल पाती हैं. 39 यूनीवर्सिटी के 30 हज़ार से अधिक छात्रों पर हुए एचआरसी के एक सर्वे के मुताबिक़, 5.1 फ़ीसदी अंतरराष्ट्रीय छात्रों ने साल 2015-2016 में अपने साथ यौन शोषण होने की बात कही है. सर्वे में शामिल 1.4 फ़ीसदी छात्रों का कहना है कि यूनिवर्सिटी में ही उनका शोषण हुआ. ये यौन दुव्यर्वहार पुरुषों के मुक़ाबले महिलाओं के साथ अधिक किया गया.

ऑस्ट्रेलिया की अंतरराष्ट्रीय छात्र परिषद की राष्ट्रिय महिला अधिकारी बेले लिम कहती हैं, ” एशियाई देशों से आए छात्रों में सेक्स शिक्षा को लेकर जागरुकता नहीं होती और यही वजह है कि वे यौन शोषण या हमलों के अधिक शिकार होते हैं और इस तरह की घटनाओं को समझ नहीं पाते या इनसे सही से निबट नहीं पाते हैं.”इतना ही नहीं ऑस्ट्रेलिया आने वाले कई छात्र ऐसे होते हैं जो अपने घर के सुरक्षित माहौल से पहली बार बाहर निकलते हैं. एक नई संस्कृति से वे अनभिज्ञ होते हैं और इससे उनके लिए खतरा और बढ़ जाता है.दक्षिण एशियाई समुदायों में ऐसे मुद्दों पर अधिक बात नहीं होती है और व्यवस्था भी इसे आसान नहीं बनाती है. सिडनी यूनिवर्सिटी पीजी रिप्रिजेंटेटिव एसोसिएशन की पूर्व सह-अध्यक्ष और पाकिस्तान से आईं छात्रा मरियम मोहम्मद बताती हैं कि एक पीड़िता ने उन्हें बताया कि जब काउंसलर ने उनसे यौन हमले के बारे में बात की तो उसे ऐसा महसूस हुआ जैसे वह उनके सामने नंगी हो रही हैं.रेप ऑन कैंपस ऑस्ट्रेलिया (ईआरओसी) के पास साल 2018 में मदद के लिए करीब सौ मामले आए जिनमें से पांच फीसदी दक्षिण एशियाई छात्र थे.

सर्वे से पता चला है कि 87 प्रतिशत छात्र जिन पर यौन हमले हुए, और 94 प्रतिशत छात्र जिनका यौन उत्पीड़न हुआ उन्होंने अपनी यूनिवर्सिटी में कोई औपचारिक शिकायत नहीं दर्ज करवाई. अंतरराष्ट्रीय छात्रों के रिपोर्ट न दर्ज कराने की मुख्य वजह वीज़ा में दिक्कतेंं आने की आशंकाएं हैं.रिपोर्ट के मुताबिक, जो छात्र रिपोर्ट दर्ज कराते हैं, उनमें से अधिकतर इसकी प्रतिक्रिया से खुश नहीं हैं. कई बार यूनिवर्सिटी कोई क़दम ही नहीं उठाती, तो कई बार सिर्फ़ सलाहकार उपलब्ध करवा देती हैं. लेकिन अभियुक्तों पर कोई कार्रवाई नहीं होती है. ऐसे में वे इससे निबटने के लिए अकेले ही रह जाते हैं.सर्वे से यह भी पता चला है कि यूनिवर्सिटी के लेक्चरर या प्रोफ़ेसर के हाथों यौन उत्पीड़न का शिकार होने वाले छात्रों में अंडर ग्रेजुएट के मुक़ाबले पोस्ट ग्रेज़ुएट छात्रों की संख्या दोगुनी थी

loading...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *