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दवा पर पाबंदी लेकिन कफ सिरप मिलते रहेंगे, स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय

केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय ने लगाने का निर्णय किया है एक माह पहले उसके टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड ने ऐसी सिफारिश की थी यही नहीं मंत्रालय 6  दवाओं के पर रोक लगाएगा इस प्रतिबंध से 1.18 लाख करोड़ रुपए के फार्मा उद्योग से 1500 करोड़ रुपए का कारोबार बंद हो जाएगा जिन दवाओं पर प्रतिबंध लगाया गया है, उनमें सिरदर्द समेत कई रोगों की दवाएं शामिल हैं

मसलन पिरामल की सेरीडॉन, मेक्‍लॉयड्स फार्मा की पेनडर्म प्‍लस क्रीम  एल्‍केम लैबोरेट्रीज की टेक्सिम एजेड शामिल हैं अच्‍छी बात यह है कि गवर्नमेंट लोकप्रिय कफ सिरप सर्दी-जुकाम की दवाओं को बंद नहीं कर रही है कुछ मीडिया रिपोर्ट में दावा है कि जुकाम, खांसी की दवा भी बंद हो जाएंगी

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सेरिडॉन बंद हुई लेकिन डीकोल्‍ड टोटल नहीं
ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक गवर्नमेंट ने सिर दर्द में ली जाने वाली सेरिडॉन को तो बंद कर दिया है लेकिन डीकोल्‍ड टोटल, फेंसेडाइल  ग्राइलिंकट्स को बंद नहीं किया है क्‍योंकि सुप्रीम न्यायालय का आदेश है कि सिर्फ टेक्निकल बोर्ड की सिफारिश पर इन दवाओं को बंद न किया जाए न्यायालय का कहना है कि सिर्फ इसलिए इन दवाओं को बंद कर दिया जाए क्‍योंकि ये 1988 से पहले की निर्मित हैं ड्रग टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड के ताजा नोटिफिकेशन के मुताबिक 328 कॉम्बिनेशन मेडिसिन बंद की गई हैं ये फिक्‍स्‍ड डोज कॉम्बिनेशन में आती है इन्‍हें इसलिए बंद किया जा रहा है क्‍यों इनका कोई थेरेप्टिक जस्टिफिकेशन नहीं है बोर्ड का कहना है कि ये दवाएं रोगियों के लिए रिस्‍की भी हैं

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कई नामचीन कंपनियों के ब्रांड शामिल
नोटिफिकेशन के मुताबिक जुकाम, खांसी  डिप्रेशन की दवाओं पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है जिन ब्रांडों की दवाएं बंद की गई हैं उनमें माइक्रोलैब ट्राईप्राइड एबॉट ट्राइबेट ल्‍यूपिन ग्‍लूकोनॉर्म शामिल है सुप्रीम न्यायालय ने बीते वर्ष 328 फिक्स्ड डोज मिलावट (एफडीसी) वाली दवाओं का फिर से परीक्षण कराने को बोला था इससे पहले इन दवाओं पर लगाई गई रोक को दिल्ली न्यायालय ने निरस्त कर दिया था केन्द्र गवर्नमेंट ने कोकाटे समिति की सिफारिश पर 10 मार्च 2016 को एफडीएस दवाओं पर रोक लगा दी थी शीर्ष न्यायालय ने अपने निर्णय में बोला था, ‘‘मामले का गहराई से विश्लेषण करने के लिए हमारा मानना है कि इन मामलों को डीटीएबी या फिर डीटीएबी द्वारा गठित उप-समिति को भेजा जाना चाहिए, ताकि इन मामलों में नये सिरे से गौर किया जा सके ’’ कोर्ट ने बोला था कि डीटीएबी  इस काम के लिये गठित होने वाली उप-समिति दवा विनिर्माताओं का पक्ष सुनेगीसमिति इस मामले में गैर-सरकारी संगठन आल इंडिया ड्रग्स एक्शन नेटवर्क की बात भी सुनेगी

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